11th Class IT Notes – Computer Network in Hindi

Computer Network in Hindi

प्रश्न 1. Networking   क्या है ?

उत्तर   जब एक से अत्यधिक Computer आपस में connect हो जाते है, एक medium (माध्यम) के जरिये, वो Medium Wire भी हो सकता है और Wireless भी हो सकता है, जिसमे Information Share हो सके. तब इसको ही Network कहा जाता है.

Resources और Information को Share करने के लिए Networking  का उपयोग किया जाता है |

प्रश्न 2. Peer-to-Peer Network की व्याख्या करें |

उत्तर   दो या दो से अधिक computers को आपस में जोड़कर उनकी फाइल्स एवं प्रिंटर को शेयर करना ही पियर टू पियर नेटवर्क का उदाहरण है| पियर टू पियर में प्रत्येक कंप्यूटर अपनी सुरक्षा का स्वयं जिम्मेदार होता है| 

यूजर डाटाबेस भी प्रतेक कंप्यूटर पर अलग अलग होता है अर्थात decentralize होता है . अतः पियर टू पियर नेटवर्क को किसी सिंगल लोकेशन से मैनेज नहीं किया जा सकता है , पियर टू पियर का सेटअप सामान्यतः छोटी संश्था , जैसे सायबर कैफ़े में किया जा सकता है जहा नेटवर्क सिक्यूरिटी प्राथमिक नहीं होती है |

प्रश्न .  Client- Server  Network की व्याख्या करें |

उत्तर   जब एक से ज्यादा कंप्यूटर हो तो हम उनको जोड़ने के लिए Client –Server  Network को तैयार किया जाता है  सर्वर कंप्यूटर कुछ नहीं बस हमारे कंप्यूटर की तरह ही एक कंप्यूटर होता है जिसमे एक स्पेशल सॉफ्टवेयर इनस्टॉल रहता है उस सॉफ्टवेयर को हम server कहते हैं |

यह सॉफ्टवेयर इन्टरनेट के जरिये अन्य computers जिन्हें हम client कंप्यूटर कहते है को सुचना या data भेजने का काम करता है। जब कोई client नेटवर्क के द्वारा Server पर Request भेजा जाता है तो server उस request को Response करता है इस तरह के मॉडल में हम हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेर को शेयर कर सकते है |

उदाहरण : प्रिंटर को सर्वर से कनेक्ट कर देते है तो फिर किसी भी वर्कस्टेशन से किसी भी फाइल का प्रिंटआउट निकल सकते है |

प्रश्न 4. Internet, Intranet and Extranet  में अंतर बताएं |

उत्तर  

InternetIntranetExranet
यह एक public नेटवर्क होता है जो की दुनिया के सभी computers को connect करने का काम करता है|यह एक private नेटवर्क होता है जो की एक Organization के अन्दर उपयोग होता है|यह एक private नेटवर्क होता है जो की Public network के मदद से Vendors, suppliers इत्यादि को डाटा शेयर करने का काम करता है|
इसके content दुनिया के किसी भी कोने में access किया जा सकता है|इसके कंटेंट केवल एक Organization के अन्दर ही access किया जा सकता है|इसके content एक से ज्यादा Organization access कर सकता है|
यह किसी एक के द्वारा नहीं चलाया जाता है|यह केवल एक Organization के द्वारा manage किया जाता है|यह Multiple organization के द्वारा manage किया जाता है|
इसके द्वारा दुनिया के सभी computers को connect किया जा सकता है|इसके द्वारा केवल एक Organization के Computes को connect किया जाता है|इसके द्वारा एक से ज्यादा Organization के computers को connect किया जाता है|
इसमें Security user के device पर depend करता है|इसमें Security Firewall पर depend करता है|इसके Security Internet और Extranet के firewall पर depend करता है|
इसको use करने के लिए हमें username और password की आवश्यकता नहीं पड़ती है|इसको access करने के लिए हमें valid username और password की आवश्यकता पड़ती है|इसको भी access करने के लिए हमें valid username और password की आवश्यकता पड़ती है|
Example: इसको आम लोग जैसे की हमलोग इस्तेमाल करते हैं|Example: इसको कोई एक Organization इस्तेमाल करती है जैसे की Wipro company अपने Staff के बीच information शेयर करने के लिए इसका इस्तेमाल करती है|Example: इसको दो या दो से अधिक Organization इस्तेमाल करते हैं जैसे की HP और Intel एक दुसरे को डाटा शेयर करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं|

Computer Network in Hindi

प्रश्न 5. OSI Model का विस्तार सहित व्याख्या करें |

उत्तर   OSI Model का पूरा नाम Open Systems Interconnection है इसे ISO(International Organization for Standardization) ने 1978 में विकसित किया थ और इस मॉडल की 7 layers होती है | OSI model यह describe करता है कि किसी नेटवर्क में डेटा या सूचना कैसे send तथा receive होती है। OSI मॉडल के सभी layers का अपना अलग अलग काम होता है जिससे कि डेटा एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम तक आसानी से पहुँच सके। OSI मॉडल यह भी परिभाषित करता है कि नेटवर्क हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर एक दूसरे के साथ लेयर के रूप में कैसे कार्य करते है।

7 layers of OSI MODEL IN HINDI (ओ एस आई मॉडल की लेयर)

PHYSICAL LAYER (फिजिकल लेयर)

OSI model में physical निचे से सबसे पहली लेयर है। यह लेयर फिजिकल तथा इलेक्ट्रिकल कनेक्शन के लिए जिम्मेदार रहता है जैसे:- वोल्टेज, डेटा रेट्स आदि। डेटा प्राप्त करते समय, इस लेयर को सिग्‍नल प्राप्त होते हैं। इसके बाद यह लेयर इसे 0 और 1 में कनवर्ट करता हैं और उन्हें Data Link layer पर भेज देता हैं।

  • इस लेयर में डिजिटल सिग्नल, इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल जाता है।
  • इस लेयर में नेटवर्क की topology अर्थात layout of network(नेटवर्क का आकार) का कार्य भी इसी लेयर में होता है।
  • फिजिकल लेयर यह भी describe करता है कि कम्युनिकेशनwireless होगा या wired होगा।
  • इस लेयर को बिट यूनिट भी कहा जाता है।
  • यह फिजिकल कनेक्शन को एक्टिवेट करता है, मेंटेन रखता है और डिएक्टिवेट करता है।
  • यह डिजिटल सिग्नल या ऑप्टिकल सिग्नल में डिजिटल / एनालॉग बिट्स को कन्‍वर्ट करता है।
  • डाटा एन्कोडिंग भी इस लेयर में किया जाता है।

Data link layer (डेटा लिंक लेयर)

OSI MODEL में डेटा लिंक लेयर नीचे से दूसरे नंबर की लेयर है। इस लेयर पर संचालित Device में Network Interface Card, Bridge or Switch शामिल है | Physical layer से डेटा प्राप्त करते समय, Data Link layer फिजिकल ट्रांसमिशन एरर को चेक करता हैं और बिट्स को डेटा “फ़्रेम” में पैकेट करता है। इस लेयर में नेटवर्क लेयर द्वारा भेजे गए डेटा के पैकेटों को decode तथा encode किया जाता है तथा यह लेयर यह भी ensure करता है कि डेटा के ये पैकेट्स त्रुटि रहित हो। इस लेयर की दो sub-layers होती है:-
*MAC(मीडिया एक्सेस कण्ट्रोल), तथा
*LLC(लॉजिक लिंक कण्ट्रोल)

  • Data link layer उस इनफॉर्मेशन को सिंक्रनाइज़ करता है जो फिजिकल लेयर पर ट्रांसमिट होती है।
  • इस लेयर का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि फिजिकल लेयर पर एक नोड से दूसरे में डेटा ट्रांसफर एरर फ्री हो।

Network layer (नेटवर्क लेयर)

नेटवर्क लेयर OSI model का तीसरा लेयर है इस लेयर में switching तथा routing तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इसका कार्य लॉजिकल एड्रेस अर्थात I.P. address भी उपलब्ध कराना है।

नेटवर्क लेयर में जो डेटा होता है वह पैकेट(डेटा के समूह) के रूप में होता है और इन पैकेटों को source से destination तक पहुँचाने का काम नेटवर्क लेयर का होता है। इस लेयर को पैकेट यूनिट भी कहा जाता है।

  • यह एक नोड से अन्य नोड तक विभिन्न चैनलों के माध्यम से सिग्नल को राउट करता है।
  • यह एक नेटवर्क कंट्रोलर के रूप में कार्य करता है। यह सबनेट ट्रैफिक मैनेज करता है।
  • यह तय करता है कि डेटा को किस रूट को लेना चाहिए।

Transport layer (ट्रांसपोर्ट लेयर) 

ट्रांसपोर्ट लेयर OSI मॉडल की चौथी लेयर है। इस लेयर का प्रयोग डेटा को नेटवर्क के मध्य में से सही तरीके से ट्रान्सफर किया जाता है। इस लेयर का कार्य दो कंप्यूटरों के मध्य कम्युनिकेशन को उपलब्ध कराना भी है। इसे सेगमेंट यूनिट भी कहा जाता है।

  • संपूर्ण डेटा ट्रांसफर के लिए जिम्मेदार।
  • यहां SPX, TCP, UDP जैसे प्रोटोकॉल काम करते हैं।

Session layer(सेशन लेयर)

सेशन लेयर OSI model की पांचवी लेयर है जो कि बहुत सारें कंप्यूटरों के मध्य कनेक्शन को नियंत्रित करती है। सेशन लेयर दो डिवाइसों के मध्य कम्युनिकेशन के लिए सेशन उपलब्ध कराता है अर्थात जब भी कोई यूजर कोई भी वेबसाइट खोलता है तो यूजर के कंप्यूटर सिस्टम तथा वेबसाइट के सर्वर के मध्य तक सेशन का निर्माण होता है।

  • ऐप्‍लीकेशन के बीच एस्टैब्लिशमेंन्ट, मैनेजमेंट और कनेक्शन के टर्मिनेशन के लिए जिम्मेदार।
  • Session layer प्रत्येक एंड पर एप्लिकेशन के बीच कोऑर्डिनेशन, एक्सचेंज और डाइलॉग सेटअप करता है।
  • यह सेशन और कनेक्शन कोऑर्डिनेशन के साथ काम करता है।

Presentation layer (प्रेजेंटेशन लेयर)

presentation लेयर OSI मॉडल का छटवां लेयर है। इस लेयर का प्रयोग डेटा का encryption तथा decryption के लिए किया जाता है। इसे डेटा compression के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। यह लेयर ऑपरेटिंग सिस्टम से सम्बंधित है।

Presentation layer को Translation layer भी कहा जाता है। एप्लिकेशन लेयर से डेटा यहां एक्‍सट्रैक्‍ट किया जाता है और नेटवर्क पर ट्रांसमिट करने के लिए आवश्यक फॉर्मेट के अनुसार मैनिप्‍युलेट किया जाता है।

  • Presentation layer यह ध्यान रखता है कि डेटा इस तरह से भेजा जाएं, ताकि रिसिवर इनफॉर्मेशन (डेटा) को समझ सके और डेटा का उपयोग करने में सक्षम हो।
  • डेटा प्राप्त करते समय, presentation layer ऐपलीकेशन लेयर के लिए डेटा ट्रांसफॉर्म कर रेडी करता हैं।
  • दो कम्युनिकेशन सिस्‍टम में लैग्‍वेज (सिंटैक्स) भिन्न हो सकती हैं। इस स्थिति के अंतर्गत presentation layer ट्रांसलेटर की भूमिका निभाता है।
  • यह डाटा कंप्रेशन, डाटा एन्क्रिप्शन, डेटा कन्वर्शन इत्यादि परफॉर्म करता है।

Application layer (एप्लीकेशन लेयर)

एप्लीकेशन लेयर OSI model का सातवाँ (सबसे उच्चतम) लेयर है। एप्लीकेशन लेयर का मुख्य कार्य हमारी वास्तविक एप्लीकेशन तथा अन्य लयरों के मध्य interface कराना है। एप्लीकेशन लेयर end user के सबसे नजदीक होती है। इस लेयर के अंतर्गत HTTP, FTP, SMTP तथा NFS आदि प्रोटोकॉल आते है। यह लेयर नेटवर्क एक्‍सेस के लिए ऐप्‍लीकेशन सर्विसेस के लिए विंडो के रूप में कार्य करता हैं और यूजर्स को प्राप्‍त इनफॉर्मेशन को दिखाता हैं।

वेब ब्राउज़र (गूगल क्रोम, फायरफॉक्स, सफारी, आदि) या अन्य ऐप – स्काइप, आउटलुक, ऑफिस यह सभी लेयर 7 एप्लीकेशन के उदाहरण हैं।

  • यह लेयर फ़ाइल ट्रांसफर, ई-मेल और अन्य नेटवर्क सॉफ़्टवेयर सर्विसेस के लिए एप्लिकेशन सर्विसेस के लिए ज़िम्मेदार है।
  • इस लेयर पर Telnet, FTP, HTTP जैसे प्रोटोकॉल काम करते हैं।

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प्रश्न 6. Base-band and Broadband में क्या अंतर है

उत्तर   Base-band :- इस ट्रांसमिशन में सम्पूर्ण मीडिया बैंडविड्थ को एक सिंगल चैनल में प्रयोग किया जाता है बेसबैंड सामन्यता डिजिटल सिग्नल के लिए प्रयोग किया जाता है | इसमें Signal Co-Axial, Twisted Pair or Fiber Optic Cables पर भेजे जाते है Baseband एक केबल पर Multiple Signal भेजने के लिए TDM का उपयोग करता है

Broadband :- ब्रॉडबैंड ट्रांसमिशन एक वाइड बैंडविड्थ डाटा ट्रांसमिशन होता है जो कई सारे सिग्नल और ट्रैफिक टाइप्स को ट्रांसपोर्ट करने में मुख्य भूमिका निभाता है. इसमें जिस मेडियम का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है वो coaxial cable, optical fiber, radio या twisted pair होते हैं.  ब्रॉडबैंड ट्रांसमिशन के द्वारा काफी हाई स्पीड में इंटरनेट को एक्सेस करते है. इसमें एक से अधिक लोग एक साथ इंटरनेट को एक्सेस कर सकते हैं.

  • बेसबैंड में डिजिटल सिग्नल का प्रयोग होता है जबकि ब्रॉडबैंड में एनालॉग सिग्नल का प्रयोग होता है.
  • बेसबैंडबस टोपोलॉजी पे कार्य करते हैं जबकि ब्रॉडबैंड ट्री टोपोलॉजी का प्रयोग करते हैं.
  • बेसबैंड में मेनचेस्टर और डिफरेंशियल मेनचेस्टर एन्कोडिंग का प्रयोग होता है जबकि ब्रॉडबैंड में PSK एन्कोडिंग का प्रयोग होता है.
  • बेसबैंड Bidirectional ट्रांसमिशन होता है जबकि ब्रॉडबैंड यूनिडायरेक्शनल ट्रांसमिशन होता है.
  • बेसबैंड में सिग्नल कम दूरी को ही तय करता है जबकि ब्रॉडबैंड में सिग्नल लम्बी दुरी तक जाते हैं.

प्रश्न 7. TDM and FDM क्या है ?

उत्तर  

TDMFDM
TDM का पूरा नाम “Time-division multiplexing”FDM का पूरा नाम “Frequency-division multiplexing” होता है
TDM अलग अलग सिग्नल के लिए timescale को शेयर करता है FDM अलग अलग सिग्नल के लिए फ्रीक्वेंसी को शेयर करता है
TDM को Digital signals और analog signals दोनों के साथ प्रयोग किया जाता हैFDM को केवल analog signals के साथ प्रयोग किया जाता है.
TDM में इंटरफेरेंस कम या न के बराबर होता है FDM में इंटरफेरेंस बहुत अधिक होता है
TDM कम जटिल माना जाता हैFDM अधिक जटिल माना जाता है

 प्रश्न 8. Topology क्या है और यह कितने प्रकार की होती है ?

उत्तर   Topology Network के layout को कहा जाता है नेटवर्क के विभिन्न नोड किस प्रकार एक दुसरे से जुड़े होते है तथा कैसे एक दुसरे के साथ कम्युनिकेशन स्थापित करते है, उस नेटवर्क को टोपोलॉजी ही निर्धारित करता है टोपोलॉजी फिजिकल या लौजिकल होता है|

टोपोलॉजी के प्रकार (Types of topology)

नेटवर्क टोपोलॉजी सामान्यत: निम्नलिखित प्रकार की होती है:-

  1. रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology)
  2. बस टोपोलॉजी (Bus Topology)
  3. स्टार टोपोलॉजी (Star Topology)
  4. मेश टोपोलॉजी (Mesh Topology)
  5. ट्री टोपोलॉजी (Tree Topology)

Ring Topology :- रिंग नेटवर्क टोपोलॉजी (Ring Network Topology) में सभी कंप्‍यूटर एक गोलाकार आकृति में अपने अधीनस्थ (Subordinate) कम्प्यूटर से जुड़े होते हैंं, इसमें कोई होस्ट (Host) या कंट्रोलिंग कम्प्यूटर (Controlling Computer) नही होता है, इसमें कोई भी कंप्‍यूटर किसी दूसरे कंप्‍यूटर पर निर्भर नहीं होता है, रिंग नेटवर्क (Ring Network) में साधारण गति से डाटा का आदान-प्रदान होता है |

लाभ (Advantages) –

  • यह नेटवर्क अधिक कुशलता से कार्य करता है, क्योकि इसमें कोई होस्ट (Host) यह कंट्रोलिंग कम्प्यूटर (Controlling Computer) नही होता |
  • यह स्टार से अधिक विश्वसनीय है, क्योकि यह किसी एक कम्प्यूटर पर निर्भर नही होता है |
  • इस नेटवर्क की यदि एक लाइन या कम्प्यूटर कार्य करना बंद कर दे तो दुसरी दिशा की लाइन के द्वारा काम किया जा सकता है |

हानि (Disadvantages) –

  • इसकी गति नेटवर्क में लगे कम्प्यूटरो पर निर्भर करती है | यदि कम्प्यूटर कम है तो गति अधिक होती है और यदि कंप्यूटरो की संख्या अधिक है तो गति कम होती है |
  • यह स्टार नेटवर्क की तुलना में कम प्रचलित है, क्योकि इस नेटवर्क पर कार्य करने के लिए अत्यंत जटिल साफ्टवेयर की आवश्यकता होती है |

बस टोपोलॉजी (Bus Topology)

बस टोपोलॉजी (Bus Topology) में एक ही तार (Cable) का प्रयोग होता है और सभी कम्प्यूटरो को एक ही तार से एक ही क्रम में जोड़ा जाता है | तार के प्रारम्भ तथा अंत में एक विशेष प्रकार का संयंत्र (Device) लगा होता है जिसे टर्मिनेटर (Terminator) कहते है | इसका कार्य संकेतो (Signals) को नियंत्रण करना होता है |

लाभ (Advantages) –

  • बस टोपोलॉजी को स्थापित (Install) करना आसान होता है
  • इसमें स्टार व ट्री टोपोलॉजी की तुलना में कम केबिल उपयोगी होता है |

हानि (Disadvantages) –

  • किसी एक कम्प्यूटर की खराबी से सारा डाटा संचार रुक जाता है |
  • बाद में किसी कम्प्यूटर को जोड़ना अपेक्षाकृत कठिन है |

स्टार टोपोलॉजी (Star Topology)

स्टार नेटवर्क टोपोलॉजी (Star Network Topology) में एक हब से ही सारे कंप्‍यूटरों को जोडा जाता है, इस नेटवर्क में एक होस्ट कम्प्यूटर होता है, जिससेे बाकी सभी कंप्‍यूटरों कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन अगर हब में कोई खराबी आती है तो सारा नेटवर्क बेकार हो जाता है, लेकिन अगर कोई लोकल कम्प्यूटर ख़राब होता है तो शेष नेटवर्क इससे प्रभावित नही होता है

लाभ (Advantages) –

  • इस नेटवर्क टोपोलॉजी में एक कम्प्यूटर से होस्ट (Host) कम्प्यूटर को जोड़ने में लाइन बिछाने की लागत कम आती है|
  • इसमें लोकल कम्प्यूटर की संख्या बढाये जाने पर एक कम्प्यूटर से दुसरे कम्प्यूटर पर सूचनाओ के आदान-प्रदान की गति प्रभावित नही होती है, इसके कार्य करने की गति कम हो जाती है क्योकि दो कम्प्यूटर के बीच केवल होस्ट (Host) कम्प्यूटर ही होता है|
  • यदि कोई लोकल कम्प्यूटर ख़राब होता है तो शेष नेटवर्क इससे प्रभावित नही होता है|

हानि (Disadvantages) –

  • यह पूरा तंत्र होस्ट कम्प्यूटर पर निर्भर होता है | यदि होस्ट कम्प्यूटर ख़राब हो जाय तो पूरा का पूरा नेटवर्क फेल हो जाता हैं |

मेश टोपोलॉजी (Mesh Topology)

मेश नेटवर्क टोपोलॉजी (Mesh Network Topology) में सारे कंप्यूटर कही न कही एक दूसरे से जुड़े रहते हैं और एक दूसरे से जुड़े होने के कारण ये अपनी सूचनाओ का आदान प्रदान आसानी से कर सकते हैं, इसमें कोई होस्ट कंप्यूटर नहीं होता है, अगर किसी भी कंप्यूटर मेश कोई खराबी आती है तो भी यह नेटवर्क काम करता रहता है टोपोलॉजी को मेश नेटवर्क (Mesh Network) या मेश भी कहा जाता है 

प्रश्न 9. Twisted Pair Cable का क्या प्रयोग है ?

उत्तर   Twisted Pair Cable का प्रयोग Local Area Network और Telephone Network  में प्रयोग किया जाता है उस केबल में सिंगल circuit के दो conductors को twist किया जाता है | Twisted Pair Cable दो type की होती है –

  1. UTP (Unshielded Twisted Pair)
  2. STP (Shielded Twisted Pair)

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प्रश्न 10. Fiber Optic क्या है ?

उत्तर   फाइबर ऑप्टिक केबल अन्य सभी केबल से महंगी है और इसकी डेटा ट्रान्सफर स्पीड भी बाकि केबल्स से अधिक होती है इस केबल में डेटा का ट्रांसमिशन इलेक्ट्रिक करंट के रूप में न होकर प्रकाश  के रूप में होता है क्योंकि प्रकाश की गति बहुत अधिक होती है इसी कारण इस केबल की स्पीड सबसे अधिक होती है | आजकल इसका प्रयोग wan नेटवर्क में अधिक किया जाता है इसका इंस्टालेशन कठिन होता है और इसे मैनेज भी आसानी से नही किया जा सकता |

प्रश्न 11. Network Interface Card की व्याख्या करें |

उत्तर   Network Interface Card ऐसे device होते है जो कंप्यूटर को नेटवर्क से connect करते है इस कार्ड  को इनस्टॉल करने के बाद रिसोर्स , इनफार्मेशन या कंप्यूटर हार्डवेयर को नेटवर्क पर शेयर कर कर सकते है इनका प्रयोग लोकल या वाइड एरिया नेटवर्क में होता है | नेटवर्क इंटरफ़ेस कार्ड की मदद से एक कंप्यूटर , दुसरे कंप्यूटर के साथ कम्यूनिकेट करने के लिए एक और चीज की मांग करती है और वो है कम्युनिकेशन का माध्यम . यदि हम वायरलेस नेटवर्क का प्रयोग नहीं कर पा रहे है तो एक NIC से दुसरे NIC के बीच नेटवर्क लाने के लिए उन्हें आपस में जोड़ना पड़ेगा . इसके लये हमें केबल को आवश्यकता पड़ेगी | आजकल desktop, Laptops, Servers, or Motherboards में nic बिल्ट इन  है |

प्रश्न 12.  Device Manager क्या है ?

उत्तर     Device Manager एक ऐसी utility है जो hardware device जैसे NIC, Sound Card, Video Card etc की configuration और Trobleshooting के लिए Use की जाती है|

प्रश्न 13.  Boot ROM क्या है ?

उत्तर     यदि आपके कंप्यूटर में operating system नही है तो आप अपने कंप्यूटर को नेटवर्क पर किसी अन्य कंप्यूटर से ऑपरेटिंग सिस्टम लोड करने के लिए कॉन्फ़िगर कर सकते है | नेटवर्क पर किसी अन्य कंप्यूटर से Operating System लोड करने के लिए इन  computers को बूट रोम विशेष चिप की आवश्कता होती है |

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प्रश्न 14.  MAC Address क्या होता  है ?

उत्तर   MAC address का मतलब Media Access Control address हैं। MAC address को hardware addresses या physical addresses भी कहा जाता है प्रतेक Network Interface Card का MAC Address अलग अलग होता है इस एड्रेस को change नही कर सकते है |MAC एड्रेस तीन नंबरिंग नेम स्‍पेस के नियमों के अनुसार बनता है, जो कि Institute of Electrical and Electronic Engineers (IEEE) द्वारा मैनेज किया जाता है।

प्रश्न 15. Switch क्या होता है 

उत्तर   Switch एक LAN यानी local area network device है  जिसको दो या दो ससे अधिक network device को connect करने के लिए किया जाता है जैसे laptop computer, mobile, printer ये सब एक ही नेटवर्क में होते हैं इसमें कंप्यूटर को Twisted Pair Cable का प्रयोग करके जोड़ा जाता है Switch OSI Model की Data Link Layer और Network Layer  पर काम करता हैं  |  switches एक ही network के device को आपस में कनेक्ट करते हैं इसलिए इनको networking device कहा जाता है।Switch एक Full Duplex Device हैं  जिसमे Host एक साथ Data को Send और Receive कर सकता है| 

प्रश्न 16. Router क्या होता है ?

उत्तर   Router एक Inter Networking Device हैं जो, जिसे दो Different Networks को अपास में जोड़ने के लिए  इस्तेमाल किया जाता है | यह OSI MODEL की Network Layer पर कार्य करता हैं |  Router Data को एक Network से दुसरे Network  में Send करता है | फिर आगे का काम Switch करता है | Router किसी Data को Network में Send करने के लिए 2 Types के Protocol Use करता है 

प्रश्न 17. HUB क्या है ?

उत्तर    Hub एक नेटवर्किंग डिवाइस है यह OSI Model की Physical Layer पर काम करता है ,  इसका इस्तेमाल नेटवर्क में बहुत सारे Computers को आपस में Connect करने के लिए किया जाता हैं | एक hub में कितने कंप्यूटर जुड़े होंगे वो इस बात पर देपेंद करता है कि HUB में कितने port लगे हुए है For Example – अगर HUB में चार port लगे है तो सिर्फ चार कंप्यूटर ही connect हो सकते है | Types of Hub – Hub दो तरह के होते है | 

Passive Hub– यह हब बिना Power Supply के काम करते हैं, इसमें signal जैसे आते वैसे ही भेज दिए जाते है | 

Active Hub- Active Hub के लिए Power Supply की जरूरत होती हैं | इस तरह के Hub में Signals को Repeater की तरह दोबारा Regenerate करके आगे भेजा जाता हैं |

प्रश्न 18. Bridge किसे कहा जाता है ?

उत्तर   Bridge  भी एक कंप्यूटर नेटवर्किंग डिवाइस हैं और यह The OSI L Model के Data Link Layer पर काम करता है | Bridge में दो पोर्ट होते है एक Incoming और दूसरा Outgoing  जिससे Network के दूसरे पार्ट को आपस में जोड़ा जाता  हैं | Bridge 2 layers पर काम करता है जिसे हम Data Link Layer करते है Bridge का use हम दो LAN को जोड़ने के लिए करते है |

प्रश्न 19. SOHO Router क्या होता है ?

उत्तर   SOHO Router का मतलब Small Office, Home Office से है इसको small organization में use करने के लिए बनाया गया है इस नेटवर्क में Wire or Wireless computers को जोड़ा जाता है |

प्रश्न 20. VLAN का क्या उद्देश्य है ?

उत्तर   VLAN एक Virtual Local Area Network है  VLAN के द्वारा विभिन्न छोटे-छोटे आकार के सब-नेटवर्क को बनाया जाता है जिन्हें हैंडल करना तुलनात्मक रूप से आसान रहता है। VLAN पूरी तरह से logical network segment होता है इसीलिए ये physical connections की तुलना मे बहुत ज्यादा flexible भी होता है | इस प्रकार VLAN use करने का एक purpose network की performance को increase ऐवम security features को बढ़ाना है |

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प्रश्न 21. IP (Internet Protocol) क्या है ?

उत्तर    आईपी एड्रेस (IP address) का पूरा नाम इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस (Internet Protocol Address), आज के समय में आईपी एड्रेस (IP address) के बगैर कंप्‍यूटर (Computer) को इंटरनेट (Internet) या किसी भी नेटवर्क (Network) से जोडा नहीं जा सकता है| सभी device की ID अलग अलग होती है |

प्रश्न 22. What is Protocol

उत्तर     प्रोटोकॉल नियमो का समूह होता है, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जोड़ने एवं उनके बीच में सूचना के आदान प्रदान के लिए बनाया गया है | प्रोटोकॉल नेटवर्क से जुड़े डिवाइस के बीच में डाटा का स्थान्तरण नियंत्रित करता है |

प्रश्न 23. TCP/IP किसे कहा जाता है ?

उत्तर   टी सी पी (TCP) का अर्थ है ट्रान्समिशन कन्ट्रोल प्रोटोकॉल (Transmission Control Protocol) इसका  प्रयोग डाटा को सुरक्षित ढंग से भेजने के लिए किया जाता है । TCP/IP  को “the language of the Internet.” के नाम से भी जाना जाता हैं। TCP/IP WWW का एक Protocol है, जिसके द्वारा  हम किसी भी Computer में आसानी से  Internet Access करने के लिए Use करते है। अगर किसी नेटवर्क में दो Devices है तो उन्हें आपस में Communicate करने के लिए Common Protocol की जरुरत होगी। TCP/IP Model(Protocol) end-to-end Communication उपलब्ध कराता है। इसका प्रयोग अलग अलग ऑपरेटिंग सिस्टम में होता है इसकी मदद से अलग अलग ऑपरेटिंग सिस्टम आपस में बातचीत कर सकते है |

प्रश्न 24. IP Address कितने टाइप के होते है ?

उत्तर   आईपी एड्रेस दो प्रकार के होते है।

1:- Static IP address:-

वह address जो कभी change नही होते है, वे हमेशा same ही रहते है static आईपी एड्रेस कहलाते हैं।

2:-Dynamic IP Address:-

ये address हमेशा बदलते रहते हैं ये address temporary कहलाते है जब भी कोई computer या device इंटरनेट से access करता है तब उसे नया आईपी address प्राप्त होता है।

प्रश्न 25. Subnet Masks का क्या उद्देश्य है ?

उत्तर   subnet mask को IP एड्रेस में network address तथा host address के बीच differentiate (अंतर) करने के लिए किया जाता है subnet का अपना अलग-अलग एड्रेस होता है. इन छोटे नेटवर्कों को बनाने के लिए subnet mask का प्रयोग किया जाता है subnet mask का केवल एक ही मुख्य उद्देश्य होता है यह identify करना कि IP address का कौन सा भाग network address है और कौन सा भाग host address.

Example

IP Address         : 192.168.2.1

Subnet Mask     : 255.255.0.0

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प्रश्न 26. PING Utility किसे कहते है उदाहरण सहित बताएं ?

उत्तर   पींग एक नेटवर्क utility program होता है जिसकी full form Packet InterNet Groper होती है | Ping utility एक command की form मे होती है एवं पिंग कमांड की हेल्प से कोई भी user किसी IP address or domain name के अस्तित्व को चेक करने के साथ उसकी स्पीड को भी पता लगा सकता है|

Ping टेस्ट यह निर्धारित करती है कि आपका क्लाइंट (कंप्यूटर, Server या अन्‍य डिवाइस) किसी नेटवर्क पर किसी अन्य डिवाइस के साथ कम्‍यूनिकेशन कर सकता है या नहीं। Ping यह टेस्‍ट करने के लिए अधिक उपयुक्त है कि कनेक्शन बनाया जा सकता है या नहीं, कनेक्शन कितना फास्‍ट है।

पींग कमांड को कैसे use करे  – 

  1. Open Command Prompt 
  2. Type Ping IP-Address or Host-Name – See below example (Ping www.google.com)

आप Ping command को use करके ये भी ensure कर सकते है की आपके computer पर TCP/IP सही तरह से configure हो गया है|

प्रश्न 27. Server Operating System क्या होता है ?

Or

प्रश्न 28. Network Operating System किसे कहा है ?

उत्तर   नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्‍टम, सॉफ्टवेयर तथा एसोसिएटेड प्रोटोकॉल्‍स (associated protocols) का संग्रह (collection) होता हैं, जो ऑटोनोमस कम्‍प्‍यूटर्स (autonomous computers) का एक समूह (set) होता है तथा ये कम्‍प्‍यूटर्स एक नेटवर्क में एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्‍टम में यूजर्स को सभी कम्‍प्‍यूटर के अस्तित्‍व (existence) की जानकारी (awareness) होती हैं तथा कोई भी यूजर किसी कम्‍प्‍यूटर में लॉइ इन (log in) कर सकता हैं एवं फाइलों को एक कम्‍प्‍यूटर से दूसरे कम्‍प्‍यूटर में कॉपी (copy) कर सकता हैं।

प्रश्न 29. UNIX and LINUX में अंतर क्या है ?

उत्तर   Unix एक Multi tasking, Multi user Operating System है जिसे सन 1969 में AT & T Bell Labs में बनाया गया था UNIX Operating System Server Workstations and Mobile Devices में ज्यादातर प्रयोग होता है | unix एक ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसका प्रयोग केवल इसके copyrighters ही कर सकते है. unix के तीन मुख्य distributions है:- IBM (AIX), HP-UX, तथा SUN SOLARIES. तथा apple भी OSX ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने के लिए UNIX का प्रयोग करता है.

LINUX :- Linux OS, UNIX operating System का एक बहुत ही popular version है. ये एक open source software है क्यूंकि इसकी source code internet में freely available है. इसके साथ इसे आप बिलकुल से Free में इस्तमाल कर सकते हैं, कहने का मतलब है की ये पूरी तरह से free है. Linux को UNIX की compatibility को नज़र में रखकर designed किया गया था. इसलिए इसकी functionality list प्राय UNIX से मिलती झूलती है.

प्रश्न 30. DHCP किसे कहा जाता है ?

उत्तर   DHCP का पूरा नाम Dynamic Host configuration Protocol है यह एक ऐसा नेटवर्क प्रोटोकॉल है जिसका प्रयोग नेटवर्क Devices को कॉन्फ़िगर करने के लिए किया जाता है यह Client Server Model पर काम करता है मतलब इस Protocol को काम में लेने वाले कुछ Service Provider होते है और कुछ Service Requester होते है.

प्रश्न 31. Domain  से क्या अभिप्राय है ?

उत्तर     Domain से अभिप्राय Centralized Model से है जिसमे Username, Password, Security Policies एक ही Centralized Databse में स्टोर होती है इस मॉडल में एक नेटवर्क में सभी कंप्यूटर को एक ही server से कण्ट्रोल किया जाता है | इसमें हर कंप्यूटर एक ही LAN या सबनेट का हिस्सा होना चाहिए

प्रश्न 32. Workgroup  से क्या अभिप्राय है ?

उत्तर   Workgroup से अभिप्राय Decentralized Model से है जिसमे Username, Password  अलग अलग कंप्यूटर पर स्टोर किया जाता है इसमें कंप्यूटर सिस्टम की संख्या सैकड़ों या हजारों में  हो सकती है। और इसमें कंप्यूटर को विभिन्न स्थानीय नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 33. Wireless Networking क्या है और यह कितने प्रकार की होती है ?

उत्तर   वायरलेस नेटवर्किंग एक ऐसे कंप्यूटर को refer करता है जो किसी भी Cable से connect नही होता | वायरलेस कनेक्शन में सेंडिंग (Sending) व रिसीविंग (Receiving) को जोड़ने के लिए ठोस माध्यम की आवश्यकता नहीं होती बल्कि इसमें वायु का उपयोग होता है वायरलेस का मुख्य उदाहरण है ब्लूटूथ| इस नेटवर्क में केबल के ऊपर होने वाले खर्चे पर रोक लगाई जाती है वायरलेस संचार रेडियो संचार पर आधारित होता है|

वायरलेस नेटवर्क के प्रकार

वायरलेस पेन (WPAN)

इस प्रकार के नेटवर्क में device को small एरिया में interconnect किया जाता है  उदाहरण जैसे किसी मोबाइल फ़ोन को लैपटॉप से connect करने के लिए ब्लूटूथ का उसे किया जाता है

वायरलेस लेन (WLAN)

WLAN स्थानिक स्त्रोतों (local resources) को इंटरनेट से जोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है | WLAN दो कम दूरी पर रखी डिवाइसों के मध्य वायरलेस वर्गीकरण विधि के द्वारा कड़ी को जोड़ता है एवं इंटरनेट एक्सेस करने के लिए कनेक्शन भी प्रदान करता है स्पीड स्पेक्ट्रम (Speed Specturm) या OFDM तकनीक के प्रयोग से यूजर स्थानिक निश्चित क्षेत्र में घूमने पर भी कनेक्टेड रखा जाता है|

वायरलेस मेन (WMAN)

वायरलेस मेट्रोपोलिटन क्षेत्र नेटवर्क कई अन्य वायरलेस लेन को जोड़ने का कार्य करता है WMAN का एक प्रकार WiMAX भी है जिसका विस्तारण IEEE802.16 ने किया है

वायरलेस वेन (WWAN)

वायरलेस वाइड एरिया नेटवर्क बड़े क्षेत्रों जैसे पड़ोसी कस्बे व शहरों को एक दूसरे से कनेक्ट करने के काम आता है यह नेटवर्क कार्यालयों की शाखाओं को या इंटरनेट एक्सेस प्रणाली को जोड़ने के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं

प्रश्न 34. WNIC क्या है ?

उत्तर    Wireless Network Interface Controls  वायर की जगह कनेक्टिविटी करने के लिए रेडियो Wave का यूज़ करते है WNIC आमतौर पर लैपटॉप या मोबाइल device में integrate होते है परन्तु डेस्कटॉप पर यूज़ करने के लिए डेडिकेटेड कार्ड की आवश्यकता होती है |

प्रश्न 35. WAP क्या है इसकी व्याख्या कीजिये ?

उत्तर    किसी भी कंप्यूटर नेटवर्क में Wireless Access Point  एक एसा Device होता है जो wireless System को  वायर्ड नेटवर्क केwifi , ब्लूटूथ , और रिलेटेड standard से कनेक्ट करता है | वायरलेस एक्सेस पॉइंट सामान्यत: राऊटर से कनेक्ट होते है वायरलेस नेटवर्क से पहले किसी भी नेटवर्क में बहुत सी केबल की आवश्यका होती थी परन्तु वायरलेस एक्सेस पॉइंट को use start होने से केबल का  use बहुत कम हो गया है वायरलेस एक्सेस पॉइंट सामन्यत : इथरनेट केबल से कनेक्ट रहता है |

प्रश्न 36. IEEE 802.11 क्या है ?

उत्तर    IEEE 802.11 standard wifi को डिफाइन करता है जिसे वायरलेस नेटवर्किंग के लिए यूज़ किया जाता है

प्रश्न 37. Wireless Security क्या होती है ?

उत्तर    Wireless Security वायरलेस नेटवर्क का यूज़ करते हुए कंप्यूटर के नुकसान की देखभाल करता है उसे Wireless Security कहा जाता है | Wifi Router के कारण की आज Wireless Internet लोकप्रिय हुआ है | आज सभी लैपटॉप और Smartphone में एक वायरलेस कार्ड है जिसमे यूजर वायरलेस कनेक्शन के माध्यम से internet चला सकता है |

प्रश्न 38. Piggybacking क्या है ? उदाहरण सहित बताएं |

उत्तर    यह दुसरो के द्वारा सदस्तया प्राप्त वायरलेस इन्टरनेट कनेक्शन का उपयोग करने की प्रथा को REFFER करता हैं |

FOR EXAMPLE :- यूजर अपने पडोसी के वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क (WLAN) से कनेक्ट कर के उसकी अनुमति के बिना इन्टरनेट चला सकता हैं |

Computer Network in Hindi

प्रश्न 39. Dial up Connection का उद्देश्य बताये ?

उत्तर    Dial up Connection, Telephone network का यूज़ करते हुए नेटवर्क कनेक्टिविटी करता है फिर जब भी हमे अपने कंप्यूटर पर internet चलाना होता है तो हम अपने कोम्पुएर से डायल करते है इससे हमारे कंप्यूटर और ISP server के बीच एक कनेक्शन create होता है और हम internet का उपयोग कर पाते है Dial up connection में Modem  की गति समान्यत 56 KBPS की होती है |

प्रश्न 40. Point to Point Protocol क्या है ?

उत्तर    Point to Point protocol एक data link layer protocol है। इस protocol को Dial Up या ISDN किसी के भी साथ use किया जा सकता है। ये protocol आपके personal computer और ISP (Internet Service Provider) को आपस में connect करता है। point to point protocol सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला लिंक प्रोटोकॉल है. इसका प्रयोगं मॉडेम के द्वारा कंप्यूटर को internet service provider (ISP) के सर्वर से connect करने के लिए किया जाता है| PPP एक या एक से अधिक मॉडेम का एक साथ यूज़ कर सकता है ऐसा करने से Bandwidth increase हो जाती है|

प्रश्न 41. ISDN क्या है ?

उत्तर    ISDN का अर्थ Integrated Services Digital Network होता है यह एक Digital Telephone सेवा होता है जिसकी सहायता से Audio, Video or Data को Digital Form में Transmit किया जाता है इसमें एक ही कनेक्शन से कंप्यूटर, प्रिंटर व फैक्स मशीन को जोड़कर उनका प्रयोग कर सकते है इसमें 64-64 KBPS के दो चैनल है इसीलिए इसमें internet का प्रयोग करते हुए फ़ोन पर बात भी किया जा सकता है |

प्रश्न 42. DSL क्या है ?

उत्तर    डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन एक आधुनिक तकनीक है जो पहले से मौजूद टेलीफोन लाइन्स का प्रयोग कर के ज्यादा बैंडविड्थ वाले डाटा को सर्विस के सब्सक्राइबर्स तक ट्रांसपोर्ट करता है। उदाहरण के तौर पर मल्टीमीडिया और विडियो। 

प्रश्न 43. WiMAX क्या है ?

उत्तर   वाइमैक्स (अंग्रेज़ी:Y-Max, WiMax) एक दूरसंचार तकनीक है। इस तकनीक के माध्यम से एक कंप्यूटर, दूसरे कंप्यूटर से बिना तारों की सहायता से संपर्क स्थापित कर सकेंगे। वर्तमान में कई देश इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। वाईमैक्स इंटरनेट और सेल्यूलर दोनों नेटवर्क पर काम करता है। इसकी गति २ एमबीपीएस होती है और दस कि॰मी॰ तक यह समान रहती है। इसकी रेंज वाई-फाई की तुलना में ज्यादा होती है।

प्रश्न 44. Network Security क्या है ?

उत्तर   नेटवर्क का मतलब है आपस में जुड़े रहना अर्थात् connected रहना.
आईटी में, नेटवर्क दो या दो से अधिक कंप्यूटरों (नोड्स) का एक समूह होता है जो कि एक दूसरे से कम्युनिकेशन paths के द्वारा जुड़े रहते है. ये कम्युनिकेशन paths वायरलेस अथवा wired हो सकता है. नेटवर्क के द्वारा यूजर डेटा, फाइल तथा डिवाइस share (साझा) कर सकते है. बिना नेटवर्क के कम्युनिकेशन नहीं हो सकता है.

Network security एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी नेटवर्क को unauthorized access (बिना अनुमति के एक्सेस), hacking तथा daniel of service attack (DOD), वायरस, worms आदि सब से बचाया जाता है.

Network security सबके द्वारा implement नहीं होती है इसके लिए एक्सपर्ट की आवश्यकता होती है.

किसी नेटवर्क में network security को बढाने के लिए हमें नेटवर्क की मोनिटरिंग करनी चाहिये, सॉफ्टवेर तथा हार्डवेयर कंपोनेंट्स का प्रयोग करना चाहिए. जैसे कि firewall, एंटीवायरस सॉफ्टवेयर आदि.

प्रश्न 45. Firewall का क्या यूज़ है ?

उत्तर   Firewall Software or Hardware device जो incoming और आउटगोइंग नेटवर्क ट्रैफिक दोनों को एनालाइज करके कंप्यूटर या नेटवर्क को सुरक्षा प्रदान करता है |

प्रश्न 46. TELNet का क्या उद्देश्य है ?

उत्तर   टेलनेट एक client server प्रोटोकॉल है जो किसी Remote Host में कनेक्शन Established करने के लिए यूज़ किये जाते है

प्रश्न 47. NETSH क्या है ?

उत्तर   NETSH एक command लाइन utility है जिसे Local or Remote computer के Network Configuration को देखने और modify करने के लिए यूज़ किया जाता है |

प्रश्न 48. VPN क्या है व्याख्या कीजिये

उत्तर   VPN का पूरा नाम है Virtual Private Network, ये एक network की तकनीक है जो public network में जैसे की Internet और private network जैसे की Wi-Fi में सुरक्षित connection बनाता है. VPN एक बहुत ही बढ़िया तरीका है अपने network को सुरक्षित रखने के लिए और अपने personal data को hackers से बचाने के लिए. VPN service का इस्तेमाल जयादातर online काम करने वाले व्यापारी, Organizations, सरकारी agencies, educational institutions और Corporation जैसे लोग करते हैं ताकि वो अपने महत्वपूर्ण data को unauthorized users से बचाकर रख सकें. VPN सभी तरह के data को यानि जो जरुरी है और जो जरुरी नहीं भी है सभी को सुरक्षित रखता है. जो आम व्यक्ति हैं और वो internet का इस्तेमाल browsing करने के लिए करते हैं वो भी VPN service का इस्तेमाल अपने phone या Computer पर VPN application की जरिये कर सकते हैं.

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